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“Azadi Ki Pramukh Keemat” (The Price of Freedom) by Yagya Mehru, the prime sacrifice

Illustrating the valorous and forgotten glimpse of sacrifice made by the son’s and daughter’s of this motherland. The poem “Azadi Ki Keemat” depicts the price that each Braveheart soul has payed to ensure freedom, equality, upliftment of the nation and it’s people.

ये कौन कहता है अज़्ज़ादी बिना खडक बिना ढाल आई है,

ये आज़ादी भगत सिंह, सुखदेव थप्पर, शिवराम राजगुरु की फांसी के फंदे को चूमने से आई है,

ये आजादी उन 26,000 आई एन ए के फौजियों की शहादत का प्रमाण है,

ये आज़दी गाधार आन्दोलन, संथाल आंदोलन, रम्पा आंदोलन की पुकार है,

ये आज़ादी उस 12 वर्ष के बाजी रॉउट की शहीदी की धधकती हुई ज्वाला है, 

ये आज़ादी अवन्तिबाई, लक्समी बाई, उदा देवी, वेलु नाच्चियार के कटे तप का प्रमाण है,

ये आज़ादी बिरसा मुंडा, वीर बुधु भगत, अल्लुरी सीताराम राजू की सरफ़रोशी की दास्तान है,

ये आज़ादी पी. सी. एच. ऐ, एच. एस. आर. ए, श्यामजी कृष्णा वर्मा के इंडियन हाउस, सावरकर के अभिनव भारत मंडल का खेल है,

ये आज़ादी दिनेश, बादल, बेनोय के राइटरस बिल्डिंग संग्राम की वीरता का परिणाम है,

ये आज़ादी उन 18-19 साल के खुदिराम, करतार सिंह और कुंवर प्रताप बारहट के बलिदानों का पुरस्कार है,

ये आज़ादी बोस, तिलक, गोखले के नारो की गूंज का अध्याय है,

ये ढींगरा, बिस्मिल, सेखर और उदम सिंह को आतंकी कहने वाले क्या बताएँगे की ये आज़ादी किसके कर्मो की सौगात है,

ये आज़ादी गोली खाने वाले ने, गोली चलने वालों ने और फांसी के फंदे पे झूलने वालों ने दिलाई है, ये आज़ादी है अज़्ज़ादी कोई चरखा चलाने की प्रतियोगिता नहीं है,

ये कौन कहता है आज़ादी बिना खडक बिना ढाल आई है
                                           
                                                       BY: YAGYA MEHRU

The poem “Azadi Ki Keemat” exaggerates and counters upon the notion that talks that the freedom has received without arms and weapons. The notion that India received the Independence only by the sacrifice of one family or by spinning wheel has been quashed. Defaming the factual reality of immense sacrifice made by Crores of Indians and concerned revolutionaries, always hurts the national sentiments.

The poem further enlists the sacrifice made by every Indian sect which reunites the spirit of Hindutva and Bharatiyata.

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